जानिए वास्तु शास्त्र के बारे में Vastu Shastra

वास्तुशास्त्र ज्योतिष शास्त्र का एक अध्याय है। वास्तुशास्त्र में भवन निर्माण से संबंधित नियमो का वर्णन किया गया है। वास्तु में प्लॉट की दिशा, स्थान एवं भवन के कमरों, चढ़ाव, दरवाजो आदि के बारे में बताया गया है। वास्तु शास्त्र अपने आप में सम्पूर्ण भवन विज्ञान है। यदि वास्तु के अनुसार घर का निर्माण किया जाए तो उस घर में रहने वालो का जीवन बहुत ही सुखमय हो जाता है। ऐसा घर धन-धान्य से परिपूर्ण रहता है व रोग एवं तनाव घर के सदस्यों से बहुत दूर रहता है। नकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश नहीं कर सकती है।

भवन निर्माण में वास्तु का उपयोग बहुत प्रचीन काल होता आया है। प्राचीन समय में राजा महाराजाओं द्वारा बनाये गए ज्यादातर किलो एवं हवेलियो में वास्तु का उपयोग पाया गया है। पहले वास्तुशास्त्र के नियमो का उपयोग केवल बड़े भवनों, किलो आदि के निर्माण में ही होता था, क्योंकि सामान्य लोगो को वास्तु का इतना ज्ञान नहीं था।

वास्तु के नियमों का प्रयोग पिछले चालीस-पचास साल से बहुत अधिक बढ़ गया है। आज वास्तु शब्द लगभग हर घर में प्रचलित हैैं। अब वास्तु के नियमो का उपयोग घर बनाने में आम लोग भी करने लग गये है। क्योंकि अब वास्तु के बारे में सभी को थोड़ा बहुत ज्ञान हो गया है। जब भी कोई प्लाट या मकान खरीदा या बेचा जाता है, तो लोग उसकी दिशा एवं साईज पर जरूर ध्यान देते है, की वह वास्तु अनुसार है, की नहीं।

भूमिपूजनसे लेकर मकान बनाने तक की पूरी प्रक्रिया मेें वास्तु का उपयोग होने लग गया है। लोग घर खरीदते समय घर की दिशा एवं कमरों, किचन किस दिशा में है आदि का पूरा ध्यान रखते है। अब तो आर्किटेक्ट, इंजीनियर, इंटीरियर डिज़ाइनर, बिल्डर व कांट्रेक्टर भी वास्तु के नियमो का ध्यान रखने लगे है।

यदि आपको लगता कि घर में नकारात्मक ऊर्जा है, धन-धान्य की कमी है, व्यापर ठीक नहीं चल रहा है या घर के लो अक्सर बीमार रहते है, तो हो सकता है, कि आपका घर वास्तु के नियमो के अनुसार नहीं बना हो। जिससे आपका सामान्य जीवन प्रभावित हो रहा हो, तो आप किसी वास्तु विशेषज्ञ से सलाह लेकर थोड़ी बहुत तोड़-फोड़ करके कमरों की दिशा व स्थिति बदलकर उसे वास्तु अनुरूप बना सकते हो।

लोग वास्तु के बारे में थोड़ा बहुत जानने लगे है। ऐसे में यदि किसी व्यक्ति का समय ठीक नहीं चल रहा है, तो उसके मन में घर के वास्तु के बारे में ख्याल आने लगता है, कि हो सकता की घर में कोई वास्तु दोष हो जिसके में परेशान हो रहा हूँ। जबकि वह उसी घर में कई सालो से बहुत सुखी जीवन व्यतीत कर रहा होता है।  किन्तु कुछ परेशानी आने पर वह वास्तु से एवं अन्य सभी ग्रहों आदि से डरने लगता है। 

इसका फायदा उठाते है, कुछ बहुत से पाखंडी वास्तुपंडित  जो भ्रामक प्रचार करके लोगो के मन में डर उत्पन्न करने लगते है। अब आप जानते हो कि डर के आगे जीत है।  इसका फायदा उठा कर पाखंडी वास्तुपंडित  ने यह जानकारी फैला दी है, कि यदि घर वास्तु के नियमो के अनुसार नहीं बना तो उसके भयानक परिणाम हो सकते है। कई बार तो लोगो को परिवार की जान खतरा बताकर भी डराया जाता है। 

कई बाबा व महाराज तो बड़े-बड़े चेनलों, इन्टरनेट, यू-ट्यूब, सोशल मीडिया आदि के माध्यम से प्रचार करके लोगो के मन में वास्तु के प्रति डर उत्पन्न करने में लगे हुए है, और अपनी रोटी सेकने में लगे हुए है।

बहुत से पढ़े-लिखे व समझदार लोग भी इन बाबाओ के चक्कर में पढ़कर अपने ऊपर आये हुए संकट को वास्तु से जोड़ने लगते है। और उनके मायाजाल में फसाने लगते है। एवं वास्तु-सुधारों के नाम पर घर में तोड़-फोड़ करवाकर उनसे बहुत अधिक मात्रा मेें पैसे ऐंठते हैैं। 

इस तरह के पाखंडी वास्तुपंडितों  के कारण, जो सही मायने में वास्तुविद होते है, उनका नाम भी ख़राब होता है। साथ ही हमारे भारत के वास्तु ग्रंथ  का नाम भी ख़राब होता है। वास्तु इतना डरावना व भयानक नहीं है, जितना उसे पेश किया जाता है। जिससे लोगोें के मन मेें वास्तु के प्रति अविश्वास तथा ऐसे पाखंडी वास्तुपंडितोें के प्रति तिरस्कार की भावना का जन्म होता है। एवं इस पाखंडियो के कारण जो सही मायने में वास्तुविद होते है, उनका नाम भी ख़राब होता है

आजकल लोग घर के वास्तु को लेकर संशय की स्थिति में रहने लगे है, क्योकि वास्तु के बारे में भ्रामक प्रचार किया जाता है। जबकि यदि हम देखे तो हमारे पूर्वजो ने कभी वास्तु के नियमो का प्रयोग अपने घर में नहीं किया था, किन्तु वे हमसे अधिक खुश, स्वस्थ व लम्बी आयु वाले होते थे। जिस घर में हमारे माँ-बाप बहुत ही ख़ुशी से रहते थे, वास्तु के डर से हम उस घर में तोड़-फोड़ करवाकर अच्छे समय आने की कामना करने लगते है।

अतः मेरा मानना तो यही है, कि वास्तु के बारे में किसी अच्छे वास्तुविद से सलाह ले जो आपको डराकर मकान में तोड़-फोड़ करवाकर आपसे पैसे एंठने के बजाय, आपको उचित परामर्श दे। कभी-कभी तोड़-फोड़ के नकारात्मक परिणाम भी देखने को मिलते है। जो कि बहुत ज्यादा नुकसानदायक होते है।

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