ज्योतिष क्या है what is horoscope

ज्योतिष विषय की खोज कब हुई इसका कोई ठीक-ठीक अनुमान नहीं है, किन्तु ज्योतिष शास्त्र, वेदों जितना ही प्राचीन है, ज्योतिष पूरी तरह से सूर्य, चन्द्रमा, तारे और गृह की स्थिति की गणना के अनुसार चलता है। ज्योतिष विषय पूरी तरह से गणितीय सिद्धांत के अनुसार कार्य करता है। ज्योतिष ऐसा दिलचस्प विज्ञान है, इसके अध्ययन से व्यक्ति को धन, यश व प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है। ज्योतिष शब्द का यौगिक अर्थ ग्रह तथा नक्षत्रों से संबंध रखनेवाली विद्या है। ज्योतिष शास्त्र एक छद्म-विज्ञान है जो किसी का भविष्य ग्रहों के चाल से जोड़कर बताने कि कोशिश करता है। अर्थात ज्योतिष ग्रहो की स्थिति के अनुसार किसी मनुष्य, जानवर व  देश का  भाग्य या किस्मत बताने वाला ग्रन्थ है। 
आधुनिक ज्योतिष का जन्म कोपर्निकस की सूर्यकेंद्रिक प्रणाली के सिद्धांत, गैलिलीयों के दूरदर्शी, केपलर के अनुभूत (emperical) गतिनियमों तथा न्यूटन के व्यापक गुरुत्वाकर्षण सिद्धांतों से हुआ।

भारतीय आचार्यों द्वारा रचित ज्योतिष की पाण्डुलिपियों की संख्या एक लाख से भी अधिक है।

ज्योतिष से निम्नलिखित का बोध हो सकता है-
1. वेदांग ज्योतिष
2. सिद्धान्त ज्योतिष या 'गणित ज्योतिष'
3. फलित ज्योतिष
4. अंक ज्योतिष
5. खगोल शास्त्र

1. वेदांग ज्योतिष
वेदाङ्ग ज्योतिष एक प्राचीन ज्योतिष ग्रन्थ है। वेदशास्त्रों के अनुसार इसकी रचना 1350 ई पू हुई थी। इसलिए वेदाङ्ग ज्योतिष को संसार का सबसे प्राचीन ग्रन्थ कहते है। यह ग्रन्थ बाकी सभी ज्योतिष ग्रंथों का आधार ग्रन्थ है। वेदाङ्ग ज्योतिष समय की गणना का शास्त्र है। ज्योतिष के अनुसार ठीक तिथि नक्षत्र पर किये गये  कार्य उचित फल देते हैं अन्यथा नहीं।

2. सिद्धान्त ज्योतिष या गणित ज्योतिष
अति प्राचीन काल से ही इससे उस विद्या का बोध होता रहा है, जिसका संबंध खगोलीय पिंडों, अर्थात्‌ ग्रहनक्षत्रों, के बारे में जानकारी से है। इसमें खगोलीय पिंडों की स्थिति, उनके गतिशास्त्र तथा उनकी भौतिक रचना पर विचार किया जाता है। 
इसके अनुसार सूर्य की कक्षा के 27 भाग जैसे अश्विनी, भरणी आदि है, जिन्हें नक्षत्र कहते हैं। 
सूर्य की कक्षा के तीस-तीस अंशों के 12 भाग राशिनाम मेष, वृष आदि है। 

3. फलित ज्योतिष
फलित ज्योतिष उस विद्या को कहते हैं जिसमें मनुष्य तथा पृथ्वी पर, ग्रहों और तारों के शुभ तथा अशुभ प्रभावों का अध्ययन किया जाता है।फल के विचार के लिये चंद्रमा के नक्षत्र का विशेष उपयोग किया जाता है। पृथ्वी सौर मंडल का एक ग्रह है। इसलिए इसपर तथा इसके निवासियों पर मुख्यतया सूर्य तथा सौर मंडल के ग्रहों और चंद्रमा का ही विशेष प्रभाव पड़ता है।

4. अंक ज्योतिष
अंक ज्योतिष के अनुसार परम्परा या आस्था ही इस शास्त्र का मूल सिद्धांत है। अंक ज्योतिष के अनुसार अंकों और भौतिक वस्तुओं या जीवित वस्तुओं के बीच एक रहस्यमयी या गूढ सम्बन्ध है। जैसे कुछ लोग किसी विशेष नंबर को शुभ या अशुभ मानते है। 

5. खगोल शास्त्र
खगोल शास्त्र एक ऐसा शास्त्र है जिसके अंतर्गत पृथ्वी और उसके वायुमण्डल के बाहर होने वाली घटनाओं का अवलोकन, विश्लेषण तथा उसकी व्याख्या की जाती है।
ज्योतिष शास्त्र एवं खगोल शास्त्र का आरंभ बिंदु एक है, फिर भी वे काफ़ी अलग है। खगोल शास्त्री जहाँ वैज्ञानिक पद्धति का उपयोग करते हैं। जबकि ज्योतिषी केवल अनुमान आधारित गणनाओं का सहारा लेते हैं। अर्थात खगोल शास्त्र यह बताता है, कि सूर्य ग्रहण किस समय होगा, वही ज्योतिष शास्त्र ये बताता है, की सूर्य ग्रहण के समय क्या करने से शुभ व अशुभ फल होते है, सूर्य ग्रहण के समय भोजन नहीं करना चाहिए एवं भगवान का भजन करना चाहिये आदि। 

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